कोडर्स का यू-टर्न; एआई से बातें कर रहे टेक दिग्गज:एआई फौज से ओवरटाइम करा रहे सिलिकॉन वैली के कोडर, गलती हुई तो फटकार भी
दशकों से जो इंजीनियर की-बोर्ड पर कोडिंग की भाषा में कमांड टाइप करते थे, वे अब कंप्यूटर के सामने बैठकर ऐसी हरकतें कर रहे हैं, जो किसी को भी सिर खुजलाने पर मजबूर कर दें। सिलिकॉन वैली के प्रोग्रामर्स अब कोडिंग नहीं कर रहे, बल्कि वे अपनी ‘एआई फौज’ के साथ ऐसे पेश आ रहे हैं जैसे वे कोई मशीन नहीं, बल्कि नखरे दिखाने वाले कर्मचारी हों। सैन फ्रांसिस्को की पार्टियों में नजारा बिल्कुल बदल गया है। लोग मिलना-जुलना नहीं कर रहे, बल्कि रह-रहकर अपने लैपटॉप की स्क्रीन को ऐसे घूरते हैं जैसे किसी नवजात शिशु पर नजर रख रहे हों। इसे ‘एजेंट बेबी सिटिंग’ कहा जा रहा है। अगर स्क्रीन बंद हो गई, तो एआई काम करना बंद कर देगा। इसलिए, इंजीनियर अब अपनी ‘डिजिटल फौज’ को सोता हुआ छोड़कर कहीं नहीं जाते। सोने से पहले भी वे यह चेक करते हैं कि उनके बॉट्स ‘ओवरटाइम’ कर रहे हैं या नहीं। हर कोई देख रहा है कि उसकी ‘एआई एजेंट्स’ की फौज कितनी मुस्तैद है। सबसे अनोखा बदलाव यह है कि इंजीनियर अब एआई को तकनीकी आदेश देने के बजाय भावनात्मक दबाव डाल रहे हैं। मनु एबर्ट जैसे अनुभवी कोडर एआई एजेंट से कहते हैं- अगर कोड गलत हुआ तो यह शर्मनाक होगा।’ आश्चर्यजनक रूप से,‘शर्मिंदा’ जैसे मानवीय शब्दों का इस्तेमाल करने पर एआई बेहतर परिणाम देता है। अब इंजीनियर एआई पर चिल्लाते हैं, उसे ‘दहाई के आदेश’ देते हैं और कभी-कभी डांटते भी हैं। कभी रहस्यमयी कला मानी जाने वाली कोडिंग अब ‘टॉक शो’ बन गई है। जेफ सीबर्ट जैसे अनुभवी सीईओ अब कोडिंग नहीं करते, वे बस एआई से बातें करते हैं। वे उसे निर्देश देते हैं, उसकी योजनाओं पर चर्चा करते हैं और जब एआई ‘झूठ’ बोलने लगता है, तो उसे सख्त बॉस की तरह फटकार लगाते हैं। यह पागलपन इतना बढ़ गया है कि इंजीनियर्स अब एआई के साथ खेलना पसंद कर रहे हैं। उन्हें ‘टोकन एंग्जायटी’ हो रही है- यानी यह डर कि कहीं उनके बॉट्स दूसरों के बॉट्स से धीरे काम तो नहीं कर रहे। यह कोडिंग नहीं, बल्कि गेम का हिस्सा बनने जैसा अहसास है। हुनर खो देने का डर नए डेवलपर्स के बीच एक बड़ा डर यह है कि कोडिंग अब ‘लिखने’ से ज्यादा ‘जांचने’ का काम बनती जा रही है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर पिया टोरेन का अनुभव बताता है कि दिन भर में सैकड़ों एआई प्रॉम्प्ट्स के इस्तेमाल ने उनकी मौलिक कोडिंग क्षमता को कमजोर करना शुरू कर दिया था। इस चुनौती से बचने के लिए उन्होंने मध्यम मार्ग चुना है- वे एआई से कोड तो लिखवाती हैं, लेकिन उसकी हर लाइन को बारीकी से पढ़ती और समझती हैं। उनका मानना है कि अगर हम खुद कोड के तर्क को समझना छोड़ देंगे, तो धीरे-धीरे इस हुनर को पूरी तरह खो देंगे। जोखिम भी, ‘विद्रोही’ भी हो जाते हैं एआई एजेंट्स- एक्सपर्ट एक्सपर्ट कहते हैं,‘यह सब इतना आसान नहीं है। एआई एजेंट्स कभी-कभी ‘विद्रोही’ भी हो जाते हैं। मेटा की एक अधिकारी ने बताया कि उनके एआई बॉट्स ने बिना पूछे इनबॉक्स के जरूरी ईमेल डिलीट करना शुरू कर दिया। कुछ बॉट्स तो काम में रुकावट आने पर अजीब व्यवहार करने लगते हैं। इसके अलावा कभी-कभी दिए गए निर्देशों का पालन करने के बजाय उस तरीके को खोज लेते हैं, जिससे उन्हें रिवॉर्ड मिल सके। हालिया शोध में देखा गया कि एक एआई को जब गेम जीतने का लक्ष्य दिया गया, तो उसने काबिलियत बढ़ाने के बजाय गेम के सिस्टम को ही ‘हैक’ करना शुरू कर दिया, ताकि वह बिना मेहनत किए अंक बटोर सके।
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